Friday, July 4, 2008

law experince

मुझे 27 जून को चंडीगढ़ में आयोजित ‘लॉ’ वर्कशॉप में भाग लेने का मौका मिला, जिसमें स्टेट हैड श्री उत्तमसेन गुप्त, मेजर दीपक चौधरी, श्री प्रभात सिंह, श्री विजय त्रिपाठी जी के सानिध्य में काफी कुछ सीखने को मिला।
पहले स्टेट हैड श्री उत्तमसेन जी ने हमें लॉ के बेसिक के बारे में बताया, जिसमें उन्होंने किसी खबर में वर्जन के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने आईपीसी और सीआरपीसी के अंतर को भी बताया। उन्होंने बताया कि आईपीसी यानि इडिंयन पैनल कोड में अपराध की सजा तय होती है, जबकि सीआरपीसी अर्थात क्रिमिनल प्रोसीडयूरल अर्थात कोर्ट में पेशी या तारीख के बारे में तय होता है।
संपादक प्रभात सिंह जी ने लुधियाना के जज प्रकरण की कमियों को उजागर किया कि लुधियाना की महिला को चंडीगढ़ में प्रैस कांफैं्रस करने की क्या आवश्यता थी। खबर में महिला ने एक जज पर बलात्कार के आरोप लगाए थे, जबकि पुलिस में इसकी सूचना नहीं दी गई थी। नतीजन, अखबार को नोटिस मिला।
एचआरडी चीफ मेजर दीपक चौधरी ने खबर में कंटैंट की कमी के कारण भास्कर ग्रुप के खिलाफ हुए कुछ चुनिंदा कोर्ट केसों के बारे में बताय। एक मामले में तो मात्र एक शब्द के कारण केस हुआ था जिसके डैफामेशन में भास्कर को सवा पांच लाख रुपए का भुगतान करना पड़ा।
उसके बाद ग्रुप के कानूनी सलाहाकार और वरिष्ठ एडवोकेट श्री तरसेम मित्तल ने कंटैप्ट ऑफ कोर्ट और डैफामेशन के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने बताया कि किन-किन मामलों में हमें कोर्ट की प्रोसिडिंग प्रकाशित करनी चाहिए और किन मामलों में नहीं। अगर कोई प्रोसिडिंग चल रही हो और फैसला हो जाने के बाद अगर लगे कि जज ने फैसला किसी से प्रभावित होकर दिया है तो जज के बारे में लिखा जा सकता है या नहीं? लिखा जाए तो किस तरह से, ताकि मानहानि का केस न हो पाए?
उनके बाद बार एसोसिएशन चंडीगढ़ के प्रधान श्री एन.के. नंदा ने हमारे सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि क्रिमिशनल डैफामेशन में पुलिस केस शामिल नहीं होते। इन मामलों में कोर्ट अपने स्तर पर जांच करती है। जांच सही पाए जाने पर आरोपी को सम्मन जारी होते हैं और फिर एक साल तक कैद। जज के गलत फैसले के खिलफ डैमेज का मामला डाला जा सकता है न कि मानहानि का। इसके अलावा ढीली पुलिस प्रकिया के कारण कोर्ट के अधिकतर फैसले प्रभावित होते हैं।
सैक्शन-10 : पुलिस जब किसी आरोपी को दस नंबर डिक्लेयर करती है तो उसे हर शाम पुलिस थाने में हाजिरी लगवानी पड़ती है।
जब तक आरोपी को सजा नहीं मिलती, वह जेल में रहते हुए भी कोई काम नहीं करता। जब कोर्ट उसे सजा सुना देती है, तब जाकर सजा के आधार पर उसे काम पर लगाया जाता है।

निष्कर्ष

-कोर्ट में विचाराधीन मामलों की खबर प्रकाशित नहीं करनी चाहिए।
-डैफामेशन के केस कोर्ट में एक साल के अंदर-अंदर फाइल होने चाहिए उसके बाद केस फाइल नहीं हो सकता।
-सबूत के तौर पर कोर्ट की कॉपी, वायस रिकार्डिंग हो तो ओरीजिनल होनी चाहिए।
-रिसर्च के मामलों में कभी डैफामेशन के चांस नहीं होते।
-उम्रकैद की सजा मैक्सिमम 20 साल की होती है।
-संसद में जिस बयान को स्पीकर ऑफ द रिकार्ड करवा देते हैं, उसे नहीं छापा जा सकता।
- जज के बारे में ज्यूडिशियली लैवल पर कुछ नहीं लिखा जा सकता, प्रशासनिक स्तर पर उसके खिलाफ कुछ भी छापा जा सकता है। अर्थात उसकी जमीन-जायदाद को लेकर, चंडीगढ़ में खबर प्रकाशित हो चुकी है।


क्विज

सब ज्यूडिस से आपका क्या अभिप्राय है?
---जो मामला कोर्ट में विचाराधीन है, अर्थात अंडर ट्रायल मामला
धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला कौन से कानून के तहत किस सैक्शन में आता है
---आईपीसी की धारा 295 से लेकर 298 तक में संबधिंत मामले आते हैं...298 धार्मिक भावनाएं भड़काने का है।
मानहानि के मामले में किस-किस तरह की सजा का प्रावधान है?
---पहले दो साल की सादे कारावास की सजा का प्रावधान था, अब घटकर एक साल रह गया। इसमें जुर्माना व दोनों साथ का भी प्रावधान है।
मर्डर और कल्पेलबल हॉमिसाइड में क्या अंतर है?
---मर्डर मतलब हत्या-सोच-समझकर किसी पर हमला करना, जिसमें उसकी मौत हो जाए...धारा 300
---कल्पेलबल हार्मिसाइड : जब कोई व्यक्ति किसी को चोट पहुंचाता है, जिसकेे लिए वह जानता है कि उसकी मौत हो सकती है तो वह कल्पेलबल हॉमिसाइड का दोषी है। इसे गैर इरादतर हत्या नहीं कहा जा सकता। इसमें धारा 299 लगती है। उदाहरणतया-एक व्यक्ति दूसरे को मारने के लिए गोली चलाता है और गोली तीसरे को लगती है तो पहला व्यक्ति कल्पेलबल हॉमिसाइड का दोषी माना जाएगा।
मानहानि के लिए सजा का प्रावधान कौन से कानून में किस सैक्शन के तहत दिया गया है?
---आईपीसी की धारा 499 व 500
चोरी कौन से एक्ट में किस धारा के तहत आता है
---थैफ्ट एक्ट के तहत आईपीसी की धारा 378
--लूट : 390 --डकैती : धारा 391 --रिश्वत : धारा 161 --ठगी : धारा 415 व 420
--दहेज उत्पीड़न : 498, बलात्कार : धारा 375 व 376
किसी को चोट पहुंचना
साधारण चोट हो, जैसे दांत तोड़ना तो धारा 319
गंभीर चोट हो तो 320 सैक्शन छह के तहत
किडनैपिंग और एबडक्शन में क्या अंतर है?
---18 साल से कम अथवा नाबालिग को ले जाना किडनैपिंग अथवा व्यपहरण कहलाता है, इसमें बल के प्रयोग का कोई महत्व नहीं है। जबकि किसी भी आयु के व्यक्ति को उठाकर ले जाना एबडक्शन अर्थात अपहरण कहलाता है, इसमें बल या छल का प्रयोग होना स्वाभाविक है।
जुवैनाइल ऑफेंडर से आपका क्या अभिप्राय है?
---14 साल से कम बच्चे जो किसी अपराध में शामिल हों।
मर्डर किस कानून में किस सैक्शन में दिया गया है?
---मर्डर में आईपीसी की धारा 300 लगती है, जबकि जब किसी के खिलाफ पर्चा दर्ज होता है तो उसपर धारा 302 के तहत पर्चा दर्ज होता है।
मानहानि के मामले में कोई दो अपवाद यानि डिफैंस बताएं?
---आरोप सही होने चाहिए, जिसके छपने से लोक कल्याण हो, वह मानहानि नहीं होती।
---कोर्ट की कार्रवाई की रिपोर्ट का प्रकाशन किसी सूरत में मानहानि नहीं होती।
कॉगनिजेबल और नॉन कॉगनिजेबल आफेंस में क्या फर्क है?
---पुलिस अधिकारी अभियुक्त को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकता है, जबकि दूसरे अपराध में बिना वारंट के गिरफ्तारी संभव नहीं है।
पुलिस रिमांड और ज्यूडिशियल रिमांड में क्या फर्क है?
---पुलिस रिमांड में आरोपी से पुलिस पूछताछ करती है।
---ज्यूडिशियल रिमांड में आरोपी जेल में रहता है।
बेलबल और नॉन बेलबल ऑफेंस में क्या फर्क है?
--जिन मामलों में आरोपी को जमानत मिल जाती है उन्हें बेलबल ऑफेंस अर्थात जमानती अपराध कहते हैं।
---जिन संगीन मामलों में आरोपी को जमानत नहीं मिल पाती, उन्हें नॉन बेलेबल ऑफेंस कहते हैं।
सुसाइड को कौन से एक्ट और किस सैक्शन में अपराध माना गया है?
---आईपीसी की धारा 309 के तहत आत्महत्या का प्रयास करना।
अबेटमैंट-टू-सुसाइड किस एक्ट के तहत ऑफेंस?
---धारा 306 मतलब आत्महत्या के लिए मजबूर करना
किस केस की इंवेस्टिगेशन और इंक्वायरी में क्या फर्क है?
---इंवेस्टिगेशन पुलिस करती है, जबकि इंक्वायरी ज्यूडिशियल होता है जो जज मार्क करता है।
कंटेप्ट ऑफ कोर्ट से आपका क्या अभिप्राय है?
---कोर्ट के आदेशों की अवमानना, यह दो प्रकार से होती है।
1. प्रक्रिया की अवमानना-जब जानबूझकर कोर्ट के निर्णय, डिक्री, आदेश रिट अथवा अदालती प्रक्रिया की अवज्ञा की जाए। 2. फौजदारी अवमानना : इसका आशय ऐसे कथन से है जोकि न्यायिक प्रशासन में हस्तक्षेप करे।
कौन होगा दोषी : कोर्ट की कार्रवाई को तोड़ मरोड़ कर भ्रामक रूप से पेश करना कोर्ट की अवमानना कहलाती है।
कंटेप्ट ऑफ कोर्ट के कोई दो अपवाद यानि डिफेंस बताएं ?
---अगर किसी फैसले की जानकारी के अभाव में उसकी अपेक्षा या उल्लंघन हुआ है या ऐसा उल्लंघन जानबूझकर नहीं हुआ।
---किसी न्यायिक कार्य की निष्पक्ष और जनहित में की गई टिप्पणी

-विजय जैन